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ब्रह्मवाणी (तारतम)
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सनंध

सनंध का अर्थ होता है- प्रमाण या सनद (मुहर) । इस ग्रन्थ में कलस ग्रन्थ के कुछ प्रकरणों का पुनः उल्लेख तथा क़ुरआन के तीस पारों का वास्तविक अभिप्राय वर्णित करते हुए दोनों पक्षों द्वारा श्री प्राणनाथ जी के ज्ञान की प्रमाणिकता सिद्ध की गयी है । महंमद साहेब के असली स्वरूप की भी पहचान कराई गई है ।  

इस ग्रन्थ का अवतरण सम्वत् १७३६ में अनूपशहर में हुआ है । इसमें अधिकांश चौपाइयाँ हिन्दुस्तानी भाषा में तथा शेष अरबी व सिंधी भाषा में हैं जिनमें अरब व सिंध के मुसलमानों को प्रबोधित किया गया है ।

इस ग्रन्थ में संसार के विभिन्न मत-मतांतरों का उल्लेख करते हुए मोमिनों (ब्रह्मसृष्टियों) के लक्षण बताये गए हैं तथा नबी (मुहम्मद साहेब) व आदि नारायण की आध्यात्मिक पहुँच का भी सुन्दर ढंग से वर्णन किया गया है । मुहम्मद साहेब की तीन सूरत (बसरी, मलकी और हकी) की पहचान, आखिरत का न्याय, आखरूल जमां इमाम मेंहदी का प्रताप, पांचों फरिश्तों व अक्षरातीत की पहचान भी कराई गई है ।

इसमें क़ुरआन के वास्तविक अर्थों के अनुसार सच्चे मुसलमान का हिंसा रहित, पवित्र व आदर्श आचरण सविस्तार व्यक्त किया गया है । शरीयत से आगे निकलते हुए तरीकत व हकीकत का मार्ग प्रस्तुत किया गया है । सच्चे मुसलमानों के लिए रोजा, हज, नमाज तथा जकात का यथार्थ रूप बताया गया है ।

इसके अतिरिक्त इस ग्रन्थ में हिन्दू और मुसलमान दोनों के आडम्बरों का स्पष्ट एवं निष्पक्ष चित्रण है । आध्यात्म की राह पर चलने वालों को यह शिक्षा भी दी गई है कि वह भाषा व वेशभूषा (धर्म) के विवाद से दूर रहकर उस परम सत्य को पाने की ओर केन्द्रित रहें ।

 

प्रस्तुतकर्ता- ज्ञानपीठ छात्र समूह  
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