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क़ुरआन व हदीसों की भविष्यवाणी

अल्लाह मुर्दों को क़ियामत के दिन उठाएगा और फिर सभी उसी की तरफ जायेंगे । (क़ुरआन मंजिल २ पारा ७ सूरत ६ आयत ३६)

भावार्थ- इस आयत में शरीर को कब्र कहा गया है और उसमें स्थित जीव ही मुर्दा है । जब इमाम महदी इल्म-ए-लद्दुन्नी लायेंगे तो जीव भी जाग्रत होकर अपनी और खुदा की पहचान कर लेंगे । इसी को कब्रों से मुर्दों का उठना कहते हैं । अल्लाह के क़ियामत के समय आने पर ही यह सम्भव हो सकेगा । इस प्रकार क़ियामत का समय मालूम होने पर इमाम महदी के स्वरूप में आने वाले ख़ुदा का समय भी स्पष्ट हो जाएगा ।

अल्लाह की तरफ से ज़िबरील द्वारा कहा गया - ये काफ़िर तुमसे पूछते हैं कि बताओ, अगर तुम सच्चे हो तो यह क़ियामत का वादा कब पूरा होगा । कह दो कि तुम्हारे साथ एक दिन का वादा है । (क़ुरआन मंजिल ५ पारा २२ सूरत ३४ आयत २९,३०)

यहां वह स्पष्ट है कि क़ियामत कल (फ़रदारोज़) को होगी, "और ऐ पैग़ंम्बर ! तुमसे सज़ा की जल्दी मचा रहे हैं (कि कहां है तुम्हारा ख़ुदाई आज़ाब ?) और अल्लाह तो कभी भी अपनी वादा ख़िलाफ़ी नहीं करेगा और कुछ शक़ नहीं कि तुम्हारे परवरदिगार के यहां का एक दिन तुम लोगों की गिनती के अनुसार १००० वर्ष के बराबर है ।" (क़ुरआन मंजिल ४ पारा २२ सूरत १७ आयत ४७)

भावार्थ- दुनिया के १००० वर्षों के बराबर ख़ुदा का एक दिन होता है और १०० वर्षों के बराबर एक रात होती है । अर्थात् १०००+१००= ११०० वर्ष । इस प्रकार क़ुरआन के कथनानुसार ग्याहरवीं सदी में इमाम महदी अल्लाह तआला का प्रकट होना सिद्ध होता है । यह स्पष्ट होता है कि क़ुरआन के अनुसार भी परब्रह्म के इस नश्वर जगत में प्रकट होने का वही समय सम्वत् १७३८ या हिज़री १०९० या ईस्वी १६९१ है जो हिन्दू धर्मग्रन्थों तथा बाइबल में लिखा है ।

क़ियामत के दिन तुम अपने अल्लाह का दीदार करोगे और कोई दिक्कत नहीं होगी । (मुक्म्मल सही बुख़ारी हज़रत इमाम सफा ६६४/९)

बेशक पहाड़ सफ़ा और मरवा अल्लाह की निशानियों में से है, तो जो व्यक्ति काबे का हज़ या उमराह करे, उस पर इन दोनों के बीच फेरे (तवाफ) करने में कोई गुनाह नहीं है । (क़ुरआन मंजिल १ पारा २ सूरत २ आयत १५८)

भावार्थ- सफ़ा और मरवा नामक दोनों पहाड़ सदगुरु धनी श्री देवचन्द्र जी और श्री प्राणनाथ जी (ईसा रूह अल्लाह और इमाम महदी) के प्रतीक हैं ।

(अल्लाह ने कहा) ज़िकरिया ! हम तुझे एक लड़के की शुभ सूचना देते हैं, जिसका नाम यहिया होगा । (और इससे पहले) हमने इस नाम का कोई ऐसे सुलक्षणों वाला लड़का पैदा नहीं किया (क़ुरआन मंजिल ४ पारा १६ सूरत १९ आयत ६) । यहिया के समान महान गुण वाला कोई भी नहीं हुआ (क़ुरआन मंजिल ४ पारा १६ सूरत १९ आयत ६५) ।

भावार्थ- ज़िकरिया सदगुरु धनी श्री देवचन्द्र जी को कहा गया है और यहिया श्री प्राणनाथ जी को कहा गया है । श्री देवचन्द्र जी के नज़री पुत्र मिहिरराज जी हैं ।

इमाम महदी श्री प्राणनाथ जी के मोमिन शरीयत के बादशाह औरंगज़ेब को पैगाम देंगे, ऐसा वर्णन क़ुरआन में मूसा, हारून और फिरौन के कथानक के रूप में दिया गया है । मूसा श्री प्राणनाथ जी को कहा गया है । हारून श्री छत्रसाल जी व फिरौन औरंगज़ेब बादशाह को कहा गया है । यह वर्णन क़ुरआन के सिपारा ९ सूरा ७ आयत १०३ से १५४ तक, सिपारा ११ सूरा १० आयत ७५ से ९० तक और सिपारा १६ सूरा २० आयत २१ से ७९ तक में किया गया है । औरंगज़ेब के द्वारा इमाम महदी के आदेश को न मानने का वर्णन सिपारा १६ सूरा २० आयत ५६ में है ।

निश्चय ही वे लोग घाटे में रहेंगे, जिन्होंने अल्लाह (इमाम महदी) से मिलने को झुठलाया (इन्कार किया) । जब अचानक उन पर वह घड़ी आ जाएगी तो वे कहेंगे- हाय ! अफसोस हमसे इस बारे में कैसे भूल हुई और वे अपनी पीठों पर अपने (गुनाहों का) बोझ उठाये होंगे । देखो ! कितना बुरा बोझ है, जो ये उठा रहे हैं । (क़ुरआन मंजिल २ पारा ७ सूरत ६ आयत ३१)

 

प्रस्तुतकर्ता- ज्ञानपीठ छात्र समूह  
   सर्वाधिकार सुरक्षित © श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ सरसावा