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ज्ञानपीठ में प्रेस की स्थापना

साहित्य समाज का दर्पण है । मनीषियों का यह कथन सामान्यत: सर्वत्र ही सुनने में आता हैं, किन्तु व्यवाहारिक जीवन में यह पूर्णरूपेण चरितार्थ नहीं हो पाता है ।

अक्षरातीत परब्रह्म का अनमोल ज्ञान इस समय साहित्य (तारतम वाणी एवं बीतक) के रूप में ही उपलब्ध है । उसे सर्वसुलभ कराने का उत्तरदायित्व हम सभी सुन्दरसाथ का है । तारतम वाणी की रसधारा की एक बूंद का भी जो रसास्वादन कर लेगा, निश्चित ही उसका जीवन धन्य-धन्य हो जायेगा ।

इसी महान लक्ष्य की पूर्ति के लिये श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के प्रांगण में प्रकाशन हेतु प्रेस की स्थापना की जा रही है, जिस से सस्ते मूल्य में सभी को उच्च स्तर का साहित्य प्राप्त हो सके ।

अत: आपसे विनम्र निवेदन है कि इस पुनीत सेवा कार्य में अधिक से अधिक सेवा करने का कष्ट करें । इस कार्य में लगभग 10 लाख रुपये की धनराशि के व्यय होने का अनुमान है ।

आप अपनी धनराशि मनीआर्डर, चैक या बैंक ड्राफट के माध्यम से श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के पते पर भेज सकते हैं । या आप सीधे ज्ञानपीठ के बैंक खातों में अपनी सेवा जमा करवा सकते हैं ।

प्रणाम जी


प्रस्तुतकर्ता- ज्ञानपीठ छात्र समूह  
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