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उद्देश्य

सभी मनीषी इस बात पर एकमत हैं कि ज्ञान मानव जीवन की अनमोल निधि है । ब्रह्मज्ञान के द्वारा मानव देवत्व से भी ऊपर उठकर ब्राह्मी स्थिति को प्राप्त करता है । वस्तुतः इस विश्व की शोभा ब्राह्मी स्थिति को प्राप्त करने वाले परमहंसों से ही है ।

किन्तु, वह ब्रह्मज्ञान यदि धर्मग्रन्थों में केवल बन्द पड़ा रहे, तो सारा संसार अज्ञानता के अन्धकार में डूबा रहता है, जिसके परिणाम स्वरूप आसुरी शक्तियों का बोलबाला हो जाता है एवं मानवता खून के आँसू बहाने के लिए मजबूर हो जाती है ।

वर्तमान समय में जो साम्प्रदायिक विद्वेष, जातिवाद, व्यक्तिवाद, क्षेत्रवाद तथा स्वार्थ एवं आडम्बरों का नग्न दृश्य दिखायी पड़ रहा है, उसे समाप्त करने का एक ही मार्ग है - धर्मग्रन्थों में निहित सत्य को शुद्ध रूप में मानवता तक पहुँचाना ।

इसी महान उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ की स्थापना की गई है । ज्ञान, शिक्षा, उच्च आदर्श, पावन चरित्र व भारतीय संस्कृति का समाज में प्रचार करना तथा वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित आध्यात्मिक मूल्यों द्वारा मानव को महामानव बनाना ही इसका दिव्य उद्देश्य है । अच्छे संस्कारों व शुद्ध ज्ञान का यह बीज जब वृक्ष का रूप धारण कर लेगा तो सम्पूर्ण विश्व इसकी शीतल छाया में सुख व शांति प्राप्त करेगा ।

 

प्रस्तुतकर्ता- ज्ञानपीठ छात्र समूह  
   सर्वाधिकार सुरक्षित © श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ सरसावा