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निजानन्द साहित्य

श्री मुख वाणी या ब्रह्मवाणी (तारतम ज्ञान)

श्री प्राणनाथ जी (अक्षरातीत) द्वारा श्री मिहिरराज (आतम श्री इन्द्रावती) के तन में विराजमान होकर आवेश द्वारा अवतरित वाणी ही ब्रह्मवाणी या तारतम है । इसे ही श्रीमुख वाणी या श्री कुलजम स्वरूप भी कहते हैं । यही निजानन्द दर्शन का आधार तथा प्रमुख ग्रन्थ है ।

श्री बीतक साहेब

श्री प्राणनाथ जी (अक्षरातीत) ने श्री लालदास (आतम श्री आस बाई) के तन में विराजमान होकर उन्हें 'महामति' की शोभा दी व उनके द्वारा श्री बीतक वाणी की रचना करवायी । इस ग्रन्थ में परमधाम के प्रेम-प्रसंग से लेकर कालमाया के ब्रह्माण्ड में अक्षरातीत व उनकी आत्माओं द्वारा की गई छह दिन की लीला का विस्तृत वर्णन है, मुख्य रूप से श्री प्राणनाथ जी की चौथी व पाँचवे दिन की लीला । श्री बीतक साहेब की पृष्ठभूमि में ही श्रीमुख वाणी के वास्तविक अभिप्राय को समझा जा सकता है । इसी ग्रन्थ से पूर्ण ब्रह्म अक्षरातीत श्री प्राणनाथ जी के स्वरूप की सही पहचान होती है । यह ग्रन्थ श्री कुलजम स्वरूप के ही समान पूजनीय है ।

मूल ब��तक के अतिरिक्त विद्वानों द्वारा लिखी अनेकों बीतकें उपलब्ध हैं, किन्तु मूल बीतक श्री प्राणनाथ जी की वाणी होने के कारण सर्वोपरि व सर्वश्रेष्ठ है । प्रतिवर्ष देश-देशान्तर में सभी सुन्दरसाथ श्रावण मास में श्री बीतक साहेब की चर्चा सुनते हैं।

श्री महामति कृत अन्य ग्रन्थ

  • परमधाम की बड़ी वृत्त - श्री प्राणनाथ जी की कृपा से श्री लालदास जी द्वारा रचित इस ग्रन्थ में परमधाम की शोभा, लीला तथा आत्मिक विज्ञान (मारिफत ज्ञान) का अद्भुत मिश्रण है ।

  • मोज़ज़ा - इस ग्रन्थ में श्री मुहम्मद साहेब के जीवन में घटित होने वाली ७२ चमत्कारी घटनाओं का बातिनी (वास्तविक) भेद स्पष्ट किया गया है । 

अन्य महत्वपूर्ण ग्रन्थ

श्री प्राणनाथ जी की आवेशित वाणी के अतिरिक्त परमहंस विद्वानों द्वारा अनेक ग्रन्थ लिखे गए और आज भी लिखे जा रहे हैं । इन्हें दास वाणी भी कहते हैं । परन्तु इनमें दिये सत्य को प्रमाणित करने के लिए महामति जी की वाणी ही सर्वमान्य है । कुछ ग्रन्थ निम्न हैं-

  • श्री महामति जी द्वारा अवतरित मूल बीतक के अतिरिक्त अन्य सुन्दरसाथ द्वारा रचित बीतक ग्रन्थ-

    • नवरंग वाणी - श्री मुकुन्द दास (नवरंग सखी)

    • तारतम सागर - श्री जयराम कंसारा (करुणावती सखी) 

    • वृतान्त मुक्तावली - श्री ब्रजभूषण

    • मिहिरराज चरित्र - श्री हंसराज बख्शी

    • वर्तमान दीपक - श्री लल्लू भट्ट

    • लीला रस सागर - श्री स्नेह सखी

  • परमधाम की बड़ी वृत्त - परमहंस महाराज श्री युगल दास जी द्वारा लिखा गया परमधाम का विस्तृत वर्णन, जो उन्होंने स्वयं परमधाम का साक्षात्कार करके लिखा है ।

  • मनमोहन रसानन्द सागर - परमहंस महाराज श्री युगल दास जी द्वारा वर्णित परमधाम की अष्ट प्रहर की लीला ।

  • मीर जी शेख जी का बयान - श्री प्राणनाथ जी के निर्देशन में औरंगज़ेब को फ़ारसी भाषा में लिखे गए रुक्कों (सन्देश पत्र) में यह किस्सा वर्णित है । (ज्ञानपीठ में उपलब्ध)

  • फ़रमान - श्री प्राणनाथ जी की कृपा से श्री भीम जी भाई द्वारा फ़ारसी, नागरी लिपि में लिखे गए पत्र जिनमें क़ुरआन के गहरे भेदों को तारतम ज्ञान की दृष्टि में प्रकट किया गया है । (ज्ञानपीठ में उपलब्ध)

  • पंचक - श्री जीवन मस्तान द्वारा श्री प्राणनाथ जी की महिमा में बोली गई वाणी ।

  • तारतम प्रणालिका - श्री बिहारी दास जी द्वारा रचित ग्रन्थ जिसमें सम्पूर्ण बीतक एवं निजानन्द सम्प्रदाय के सिद्धान्तों का संक्षिप्त वर्णन है ।

  • रसानन्द सागर व ब्रह्म बृहद् पत्रिका - परमहंस महाराज श्री गोपालमणि जी ।

  • श्री दर्शन दयाल जी के पद्य ।

इसके अतिरिक्त परमहंस संतों द्वारा रचित और भी बहुत सा साहित्य है परन्तु विस्तार के डर से उन सबका वर्णन यहां संभव नहीं है ।

संस्कृत ग्रन्थ

  • विद्वद्दमनी - श्री विद्युद्दमन भट्ट           (हिन्दी भाष्य ज्ञानपीठ में उपलब्ध)

  • निगमार्थ दीपिका - श्री विद्युद्दमन भट्ट      (हिन्दी भाष्य ज्ञानपीठ में उपलब्ध)

  • आनन्द सागर - श्री कृष्ण मणि (रीवा)

  • विराट पट दर्शन - श्री कृष्ण दत्त शास्त्री (कानपुर) 

अन्य पठनीय प्राचीन प्रमाण ग्रन्थ

  • बुद्ध गीता - परब्रह्म श्री विजयाभिनन्द बुद्ध के सम्बन्ध में ब्रह्मा जी द्वारा नारद जी को दिया गया ज्ञान ।

  • बुद्ध स्तोत्र - श्री विजयाभिनन्द बुद्ध के स्वरूप की पहचान से सम्बन्धित ज्ञान जो शिव जी ने उमा को सुनाया ।

  • पुराण संहिता - वेदव्यास जी ने कठोर तप से वेद व शिव जी से यह ज्ञान प्राप्त किया । इसमें क्षर, अक्षर एवं अक्षरातीत का निरूपण तथा योगमाया एवं परमधाम की लीला का वर्णन है ।

  • माहेश्वर तन्त्र - यह ज्ञान सदाशिव ने कूटावस्था में ब्रह्म से प्राप्त किया । कालान्तर में इसे शिव जी ने समाधि अवस्था में सदाशिव से प्राप्त किया तथा तद्पश्चात् पार्वती जी को वर्णन किया । इसमें भी क्षर, अक्षर व अक्षरातीत के धाम, स्वरूप व लीला का वर्णन है ।

  • तफ़सीर-ए-हुसैनी - यह ग्रन्थ क़ुरआन मज़ीद का सर्वप्रथम अरबी-फ़ारसी भाष्य है, जो हज़रत अली के सुपुत्र हुसैन साहेब के द्वारा किया गया । (हिन्दी अनुवाद ज्ञानपीठ में उपलब्ध)

प्रस्तुतकर्ता- ज्ञानपीठ छात्र समूह  
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