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कार्यशैली

प्रबंध तंत्र

ज्ञानपीठ की व्यवस्था दो समितियों के जिम्मे है - विद्वत मंडल व कार्यकारिणी ट्रस्ट । विद्वत मंडल में उच्च स्तर के आध्यात्मिक विद्वान व आचार्य सम्मिलित हैं जो समस्त शिक्षा , साहित्य व ज्ञान प्रचार का कार्य सम्भालते हैं । २१ सदस्यों वाली कार्यकारिणी ट्रस्ट का प्रत्येक सदस्य , स्नातक या उससे उच्च शिक्षा प्राप्त , आध्यात्मिक भावों से भरपूर है , जो आर्थिक व्यवस्था सम्भालते हैं ।

आर्थिक नीति

ज्ञानपीठ इस बात के लिए कृतसंकल्प है कि उसे प्राप्त होने वाली आर्थिक सहायता का ७०% भाग शिक्षा व साहित्य में खर्च किया जाएगा ।

शिक्षण नीति

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ में श्रीमुख वाणी, बीतक, वेद, उपनिषद्, दर्शन, अष्टाध्यायी महाभाष्य तथा अन्य धर्मग्रन्थों ( कतेब और संत साहित्य ) की विधिवत शिक्षा की व्यवस्था है । इसके अतिरिक्त योग, संगीत, विज्ञान, गणित, अंग्रेजी, अन्य भारतीय भाषाओं, समाजशास्त्र, कम्प्यूटर, आदि का भी ज्ञान प्रदान किया जाता है । शिक्षा के साथ-साथ उपरोक्त सभी विषयों पर शोध व नवीन चिन्तन के लिए प्रेरित किया जाता है ।

ज्ञानपीठ का मुख्य उद्देश्य समाज में ज्ञान व शिक्षा का प्रचार करना है । अतः शिक्षा प्राप्ति सहज बनाने ��े लिए यहाँ प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए कोई विशेष मापदंड नहीं है । न ही उनमें धर्म, जाति, प्रान्त, वर्ग, आदि के आधार पर कोई भेद किया जाता है । ज्ञानपीठ में शिक्षा ग्रहण करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी का सम्पूर्ण खर्च भी ज्ञानपीठ ही देता है ।

पुस्तकीय ज्ञान के अतिरिक्त उच्च आदर्श, पावन चरित्र व पुरुषार्थ का विकास भी अति आवश्यक है । ज्ञानपीठ के पाठ्यक्रम में आध्यात्मिक उन्नति पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिसके लिए प्रत्येक छात्र को सात्विक आहार के साथ-साथ ध्यान साधना की प्रक्रियाओं से गुजरना अनिवार्य है । प्रत्येक शिक्षार्थी को विनम्र, सुशील, सेवाभावी बनने एवं ब्रह्मज्ञान को सम्पूर्ण विश्व में फैलाने की प्रतिज्ञा करनी होती है ।

 

प्रस्तुतकर्ता- ज्ञानपीठ छात्र समूह  
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