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ब्रह्मवाणी (तारतम)
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     श्री प्राणनाथ जी का वाङमय कलेवर 
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कयामतनामा

यह ग्रन्थ दो भागों में प्रस्तुत किया गया है- छोटा कयामतनामा और बड़ा कयामतनामा । ये दोनों ही ग्रन्थ सम्वत् १७४७ में चित्रकूट में अवतरित हुए । यद्यपि ये ग्रन्थ श्री प्राणनाथ जी की आवेश शक्ति से ही प्रकट हुए, परन्तु इनमें महाराजा छत्रसाल जी की छाप है, अर्थात् श्री जी द्वारा यह शोभा उन्हे दी गई है ।

क़ुरआन के अनुसार ग्यारहवीं सदी (हिजरी) में आख़रूल इमाम महंमद महदी साहिब़ुज्ज़मां (श्री प्राणनाथ जी) प्रकट होंगे । इन ग्रन्थों में उन्हीं की पहचान विशेष रूप से बतायी गई है । इसके अतिरिक्त परमधाम की आत्माओं तथा संसार के जीवों के आचरण का भेद प्रस्तुत किया गया है । 

इन ग्रन्थों में महंमद साहेब को अक्षरातीत का मेअराज (साक्षात्कार) होने का वर्णन है । इसके अतिरिक्त महंमद साहेब की तीन सूरतों- बसरी, मलकी और हकी की हकीकत स्पष्ट की गई है। 

इसमें क़ुरआन के विभिन्न किस्सों का बातिनी अर्थ किया गया है । दस प्रकार की दोज़ख, इमाम महदी के प्रकटन के साथ ही क़ियामत के ज़ाहिर होने, आदि का वर्णन है । संक्षाप में, यह ग्रन्थ आखिरत की सारी बातें स्पष्ट करते हैं ।

 

प्रस्तुतकर्ता- ज्ञानपीठ छात्र समूह  
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