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श्री प्राणनाथ जी ही विजयाभिनन्द बुद्ध
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  विजयाभिनन्द बुद्ध  »  श्री प्राणनाथ जी ही विजयाभिनन्द बुद्ध  »  श्री प्राणनाथ जी का वास्तविक परिचय

श्री प्राणनाथ जी का वास्तविक परिचय

श्री प्राणनाथ जी का स्वरूप ज्ञान की दोपहरी का वह सूरज है, जिसके उग जाने पर अध्यात्म जगत में किसी भी प्रकार का अन्धकार रूपी संशय नहीं रहता । वेदों की ऋचायें जिस अक्षर अक्षरातीत को खोजती हैं, दर्शन ग्रन्थ जिस सत्य को पाना चाहते हैं, गीता और भागवत जिस परम लक्ष्य उत्तम पुरुष की ओर संकेत करती हैं, क़ुरआन की आयतें जिस अल्लाह तआला का वर्णन करना चाहती हैं, बाइबिल जिस प्रेम के स्वरूप का वर्णन करने का प्रयास करती है और सन्तों की वाणियां जिस सत्य की ओर संकेत करती हैं, उसकी पूर्ण प्राप्ति श्री प्राणनाथ जी की वाणी में निहित है ।

सच्चिदानन्द श्री प्राणनाथ जी के इस स्वरूप के प्रकटन की प्रतीक्षा सभी देव, तीर्थंकर, अवतार, औलिया, पैगम्बर, फकीर, ऋषि, योगी, आदि कर रहे थे । उनके स्वरूप का दर्शन पाकर सभी धन्य हो गये । पूर्णब्रह्म श्री प्राणनाथ जी हिन्दू, मुसलमान, यहूदी और ईसाई सभी के हैं । परमात्मा कभी भी धर्म या सम्प्रदाय के आधार पर भेद नहीं करते, वे तो सिर्फ प्रेम व समर्पण को महत्व देते हैं ।

विजिया अभिनंदन बुध जी , और निहकलंक अवतार ।

वेदों कहया आखिर जमाने , एहीं हैं सिरदार ।। (श्री मुख वाणी- सनंध ३६/४६)

हिन्दू धर्मग्रन्थों में कहा गया है कि ब्रह्माण्ड के आखिरी समय जब शाका सालवाहन १६०० तथा विक्रम सम्वत् १७३५ होगा, तब विजयाभिनन्द निष्कलंक बुद्ध स्वरूप श्री प्राणनाथ जी ब्रह्मवाणी के ज्ञान के साथ इस संसार में प्रकट होंगे । इस कलियुग में वे ही सबके स्वामी होंगे ।

वेदों कह्या आवसी , बुध ईस्वरों का ईस ।

मेट कलियुग असुराई , देसी मुक्त सबों जगदीस ।। (श्री मुख वाणी- खु. १२/३१)

हिन्दू धर्मग्रन्थों में भविष्यवाणी की गयी है कि २८ वें कलियुग में ईश्वरों के भी ईश्वर श्री विजयाभिनन्द बुद्ध जी इस संसार में प्रकट होंगे । वे अपने अलौकिक ज्ञान से कलियुग (माया) की शक्ति को समाप्त करके सभी प्राणियों को अखण्ड मुक्ति प्रदान करेंगे । यह संकेत पूर्णब्रह्म श्री प्राणनाथ जी के लिए है ।

लिख्या है फुरमान में , मेहेदी आवेगा आखिर ।

उड़ाए मारसी दज्जाल को , राह देसी सीधी कर ।। (श्री मुख वाणी- सनंध ३१/४१)

क़ुरआन में ऐसा वर्णन है कि ११ वीं सदी हिज़री में इमाम मुहम्मद महदी के रूप में स्वयं अल्लाह तआला इस धरती पर आयेंगे । इमाम महदी अपने दिव्य ज्ञान से दज्जाल (माया) की शक्ति समाप्त कर देंगे तथा तौबा (मुक्ति) का द्वार खोल देंगे । यह वर्णन भी श्री प्राणनाथ जी के लिए है ।

ईसा अल्ला आवसी , कहे किताब फिरंगान ।

किल्ली भिस्त जो याही पे , खोल देसी नसरान ।। (श्री मुख वाणी- खु. १३/८२)

बाइबल में कहा गया है कि ईसा अल्लाह (Second Christ) आयेंगे । उनके हाथ में बहिश्तों (मुक्ति स्थान) की कुंजी होगी और वे ईसाइयों को बहिश्तों में भेजेंगे । यहाँ भी श्री प्राणनाथ जी के प्रकटन के बारे में ही बताया गया है ।

जहूद कहे मूसा बड़ा होए , ताके हाथ छूटें सब कोए ।

यों सारों ने रसम जुदी कर लई , सब बुजरकी धनी की कही ।। (श्री मुख वाणी- बड़ा क. १/२९)

यहूदी कहते हैं कि आखिरी मूसा सबसे बड़े हैं । जब वे इस संसार में प्रकट होंगे तो उनकी कृपा से सभी को अखण्ड मुक्ति मिलेगी । इस प्रकार सभी धर्म के लोगों ने अपनी-अपनी अलग रीति बना ली है परन्तु उन सब में पूर्ण समानता है । वे सब एक ही बात को अलग-अलग ढंग तथा शब्दों में कहते हैं । यह सब अनजाने में श्री प्राणनाथ जी की ही महिमा गा रहे है ।

सुर असुर सबो को ए पति , सब पर एकै दया ।

देत दीदार सबन को सांई , जिनहूं जैसा चाहया ।। (श्री मुख वाणी- कि. ५९/७)

श्री प्राणनाथ जी ही हिन्दू, मुसलमान, यहूदी व ईसाई सब के प्रियतम परमात्मा हैं । वे सब पर एक समान कृपा करते हैं । जो उनको जिस तरह पहचानता है, उनको परब्रह्म प्राणनाथ जी उसी रूप में दर्शन देते हैं ।

सम्वत् १७४०-१७५१ तक की लीला में जो भी सुन्दरसाथ अपने भावों के अनुसार श्री प्राणनाथ जी को परमधाम के युगल स्वरूप श्री राज श्यामा जी, ब्रज-रास के श्री कृष्ण, अरब के मुहम्मद साहब या सदगुरु धनी श्री देवचन्द्र जी के स्वरूप में मानता था, उसे चर्चा के दौरान उसी स्वरूप का दर्शन होता था ।

एही अक्षरातीत हैं , एही हैं धनी धाम ।

एही महंमद मेंहदी ईसा , एही पूरे मनोरथ काम ।। (श्री बीतक साहब- ६६/७१)

श्री प्राणनाथ जी हिन्दुओं के अक्षरातीत तथा मुस्लिमों के लिए इमाम मुहम्मद महदी हैं । वे ही ब्रह्मआत्माओं के प्रियतम धाम धनी हैं तथा उनकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाले समर्थ स्वामी हैं ।

श्री प्राणनाथ जी के लिए राज, अक्षरातीत, प्रियतम, सुन्दरवर, परब्रह्म, परमात्मा, पूर्णब्रह्म, सच्चिदानन्द, श्याम, सनातन पुरुष, उत्तम पुरुष, धाम धनी, विजयाभिनन्द निष्कलंक बुद्ध, प्रियतम, ख़ुदा, अल्लाह तआला, खसम, हक़ तआला, रब्ब, इमाम मुहम्मद महदी साहिबुज़्ज़मां, The Lord, Supreme Truth God, आखिरी मूसा, आदि सम्बोधन प्रयुक्त होते हैं ।

कई देव दानव हो गए , कई तीर्थंकर अवतार ।

किन सुपने ना श्रवनों , सो इत मिल्या नर नार ।। (श्री मुख वाणी- सनंध ३३/३)

इस संसार में अनगिनत देवी-देवता और दानव जन्म ले चुके हैं । बहुत सारे तीर्थंकर व अवतार भी इस मृत्यु लोक में अवतरित हो चुके हैं । करोड़ों वर्षों से चल रहे इस ब्रह्माण्ड में अक्षरातीत सच्चिदानन्द परमात्मा के बारे में कोई सपने में भी नहीं जानता था । सभी नर-नारी अवतारों, महापुरुषों अथवा जड़ वस्तुओं की पूजा कर रहे थे । परन्तु अब सबके भाग्य खुल गए कि उन्हें ऐसा अनमोल धन इतनी सरलता से प्राप्त हो गई ।

ज़बराइल फरिश्ते के माध्यम से परब्रह्म ने क़ुरआन, गीता, श्रीमद्भागवत, बाइबल, आदि ग्रन्थों में अपने आने के विषय में संकेत लिखवाए थे । अन्ततः कलियुग में एक अनहोनी घटना के रूप में श्री प्राणनाथ जी इस मायावी जगत में प्रकट हुए हैं ।

साहेदी देवे खुदाए की , सोई खुदा जान ।

सो साहेदी किन ना लई , हाय हाय मगज न पाया कुरान ।। (श्री मुख वाणी- खि. १२/३३)

क़ुरआन में लिखे हुए इस कथन के रहस्य को किसी ने भी नहीं समझा कि कियामत के समय खुदा की साक्षी देने वाला खुद खुदा होगा । हाय ! हाय ! कितने शोक का बात है कि कुरआन की इस साक्षी को लेकर संसार ने श्री प्राणनाथ जी के स्वरूप को नहीं पहचाना ।

क़ुरआन के पारः एक (१) सूरः दो (२) अलिफ लाम मीम आयत १०५-१०७ में यह वर्णन है कि खुदा की साक्षी देने वाला स्वरूप उनके तदोगत (वैसा ही) होगा । क़ुरआन में एहिया के नाम से भी उस स्वरूप को परिभाषित किया गया है । ऐसा ही प्रसंग बाइबल में भी है ।

नाम सारे जुदे धरे , ऊपर करी इसारत ।

फुरमान खोल जाहेर करे , धनी जानियो तित ।। (श्री मुख वाणी- खु. १४/७)

सभी धर्मग्रन्थों में परमात्मा के अलग-अलग नाम बताये गये हैं, परन्तु वे सभी एक अक्षरातीत की ओर ही संकेत करते हैं । कलियुग में उनके प्रकट होने का वर्णन भी किया गया है । सभी धर्मग्रन्थों में गुह्य सांकेतिक भाषा का प्रयोग किया गया है । इन रहस्यमय ज्ञान का भेद वही खोल सकता है जिसकी आज्ञा से ऐसा वर्णन किया गया है । क़ुरआन में तो लिखा है कि जो इसके भेदों को स्पष्ट करे, उसे ही अल्लाह समझना ।

अतः श्री प्राणनाथ जी निश्चित रूप से पूर्णब्रह्म अक्षरातीत हैं क्योंकि किसी भी साधारण जन से न होने वाला यह असम्भव कार्य उन्होंने ही करके दिखाया । उनकी ही स्तुति सभी धर्मग्रन्थों में विभिन्न नामों व भाषा में की गयी है ।

आया सबका खसम , सब सब्दों का उस्ताद ।

महंमद मेंहेदी आये बिना , कौन मिटावे वाद ।। (श्री मुख वाणी- सनंध ३०/४१)

अब सभी धर्मग्रन्थों के ज्ञान के स्वामी श्री प्राणनाथ जी आ गये हैं । उनके आये ब��ना सभी मत-पन्थों के झगड़े (संशय) कौन मिटा सकता है ? श्री प्राणनाथ जी द्वारा दिया गया तारतम ज्ञान सर्वकालीन परम सत्य तथा पूर्ण विज्ञान है । तारतम ज्ञान के बिना संसार के धर्मग्रन्थों की आंकड़ी नहीं खुल सकती, न ही उनमें समानता दर्शायी जा सकती है ।

हदीसों व बाइबल के कथनानुसार इमाम महदी (second christ) आकर संसार में अलौकिक ज्ञान प्रकट करेंगे तथा सभी मतों के झगड़ों को समाप्त कर एक सत्य की राह दर्शायेंगे ।

सुनियो दुनिया आखिरी , भाग बड़े हैं तुम ।

जो कबुं कानों ना सुनी , सो करो दीदार खसम ।। (श्री मुख वाणी- सनंध ३३/१)

श्री इन्द्रावती जी कहती हैं कि हे आखिरी समय के लोगों ! तुम सभी बहुत भाग्यशाली हो कि तुम्हे ऐसे सच्चिदानन्द श्री प्राणनाथ जी के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, जिनके बारे में किसी मनुष्य ने तो क्या, कभी किसी देव या अवतार ने भी नहीं सुना था । वह परमात्मा जो सबकी सोच से भी परे है, आज वह साक्षात् इस संसार में विराजमान है । उनका प्रत्यक्ष दर्शन करो ।

 

प्रस्तुतकर्ता- ज्ञानपीठ छात्र समूह  
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