सच्चिदानन्द स्वरूप परमात्मा एक ही है । वह वैकुण्ठ, निराकार, क्षर (नासूत) से परे योगमाया, अक्षर ब्रह्माण्ड (जबरूत) से भी परे दिव्य ब्रह्मपुर, परमधाम (लाहूत) में विराजमान हैं । वह देवी-देवताओं, त्रिदेव व अक्षर ब्रह्म से भी परे हैं तथा उन्हें ही परब्रह्म, प्राणनाथ, अक्षरातीत, नूरजमाल, अल्लाह, खुदा, The Lord, आदि नामों से पुकारा जाता है ।

यजुर्वेद में कहा गया है कि वह ब्रह्म नूरमयी ज्योति वाला है । अथर्व वेद में उन्हें कान्तिमान, मनोहर, नित्य तरुण कहा गया है । क़ुरआन में उनकी अमरद सूरत का बयान है । ऐसा सर्वश्रेष्ठ परब्रह्म ही एकमात्र उपास्य है ।