Shri Prannath Gyanpeeth-     मासिक पत्रिका आर्थिक सेवा सम्पर्क करें
                                                                 




मुख्य संस्था अध्यात्म निजानन्द दर्शन विजयाभिनन्द बुद्ध ब्रह्मवाणी (तारतम) चितवनि महान व्यक्तित्व साहित्य प्रवचनमाला सुन्दरसाथ
श्री प्राणनाथ जी ही विजयाभिनन्द बुद्ध
     श्री प्राणनाथ जी का वास्तविक परिचय 
     श्री प्राणनाथ जी का प्रकटन समय
     हिन्दू पक्ष »
          धर्मग्रन्थों की भविष्यवाणियाँ 
          कबीर वाणी का सार 
          हरिद्वार का शास्त्रार्थ »
     मुस्लिम पक्ष » 
          क़ुरआन व हदीसों की भविष्यवाणी 
          क़ियामत का ज़ाहिर होना 
          क़ुरआन के गुह्य रहस्य 
          मक्का-मदीना से आये वसीयतनामे 
          औरंगज़ेब का आज़म को अंतिम पत्र  
     ईसाई पक्ष »
          बाइबल की भविष्यवाणी 
 
 
 
  विजयाभिनन्द बुद्ध  »  श्री प्राणनाथ जी ही विजयाभिनन्द बुद्ध  »  मुस्लिम पक्ष  »  क़ुरआन के गुह्य रहस्य

क़ुरआन के गुह्य रहस्यों का भेद

इमाम महदी श्री प्राणनाथ जी ने प्रकट होकर मुहम्मद साहब (सल्ल.) द्वारा की गई भविष्यवाणी को पूरा कर दिया है । अल्लाह की शक्ति से उन्होंने क़ुरआन के हरुफे मुक्तेआत के गुह्य रहस्य अब खोल दिये हैं । इस प्रकार क़ुरआन में वर्णित वह साक्षी भी पूरी हो गयी जिसमें कहा गया है कि हरुफे मुक्तेआत का भेद स्वयं अल्लाह ही इमाम महदी के रूप में खोलेंगे ।

मुहम्मद साहब (सल्ल.) को मेअराज की रात्रि में अल्लाह का दीदार हुआ और शरीयत, तरीकत, हकीकत व मारिफत का ज्ञान प्राप्त हुआ । ख़ुदा के हुक्म से उन्होंने केवल शरीयत व तरीकत का ज्ञान क़ुरआन में प्रकट किया । ख़ुदा ने उन्हें वादा किया कि आखिरत को वह स्वयं इमाम महदी के रूप में प्रकट होकर हकीकत व मारिफत का ज्ञान अपनी रूहों (ब्रह्मसृष्टियों) के बीच में प्रकट करेंगे । श्री प्राणनाथ जी ने आकर उस वादे को पूरा करते हुए जाग्रत बुद्धि का तारतम ज्ञान (श्री कुल्जम स्वरूप) अवतरित किया । परमधाम के इस अलौकिक ब्रह्मज्ञान (हकीकत व मारिफत के ज्ञान) को पाकर इस नश्वर संसार के जीव उसी प्रकार अज्ञानता की निद्रा से जाग जाते हैं जैसे मुर्दे कब्रों से उठते हैं ।

क़ुरआन के कुछ भेदों का स्पष्टीकरण संक्षेप में इस प्रकार है-

 

अलिफ लाम मीम का रहस्य

क़ुरआन के पारा २ सूरा २ (अल बकरा) की पहली आयत में अलिफ लाम मीम लिखा है । इसके विषय में निःसंकोच रूप से यही कहा जाता है कि यह हरुफे मुक्तेआत है और इसका भेद केवल अल्लाह ही जानते हैं ।

इमाम महदी श्री प्राणनाथ जी ने इसके भेदों को अपनी वाणी में इस प्रकार स्पष्ट किया है-

अल्लफ कहया महमद को , रूह अल्ला ईसा लाम ।

मीम मेहेदी पाक से , ए तीनों एक कहे अल्ला कलाम ॥ (श्री कुल्जम स्वरूप- खु. १५/२२)

मुहम्मद साहब (सल्ल.) के स्वरूप में स्थित नूरजलाल (श्री अक्षर ब्रह्म) की आत्मा को अलिफ (सत्) कहा गया है । रूह अल्लाह (श्री श्यामा जी) को लाम (आनन्द स्वरूप) कहा गया है । इमाम महदी साहिब्बुज़मां श्री प्राणनाथ जी को मीम (चिदघन स्वरूप) कहा गया है । इस प्रकार यह तीनों शब्द ख़ुदा की तीन सूरतों बसरी, मलकी व हकी के प्रतीक हैं । हिन्दू धर्म में जिसे सत् + चिद् + आनन्द कहा गया है, उसे ही कतेब परम्परा में अलिफ लाम मीम कहा गया है । परमधाम में ये तीनों (सत्, चिद व आनन्द) एक ही अल्लाह सच्चिदानन्द परमात्मा के अद्वैत स्वरूप हैं ।

 

ऐन और गैन का गूढ़ार्थ

आज सारा संसार मुहम्मद साहब (सल्ल.) को मात्र रसूल के रूप में जानता है कि वे ख़ुदाई हुक्म से क़ुरआन लेकर आये । यदि बातूनी दृष्टि से विचार किया जाये तो उनके अन्दर नूरजलाल (श्री अक्षर ब्रह्म) की आत्मा थी, जो परमात्मा के अद्वैत स्वरूप के अन्दर है, इसलिए उन्हें 'ऐन' कहा गया है । इस संसार में जब ख़ुदा के हुक्म से आये तो 'गैन' कहलाये । जब यहाँ का कार्य पूरा करके मुहम्मद साहब (सल्ल.) की रूह वापस परमधाम गयी तो अपने उसी अद्वैत स्वरूप में पुनः स्थित हो गयी ।

रसूल आया हुक्में , तब नाम धराया गैन ।

हुकुम बजाए पीछा फिरया , तब सोई ऐन का ऐन ॥ (श्री कुल्जम स्वरूप- सनंध ३६/६२)

 

पांच तरह की पैदाइश का रहस्य

क़ुरआन के सत्ताइसवें सिपारे की सूरा ५५ अर रहमान की आयत ११-१२ तथा २६,२७ में तीन तरह की सृष्टि का वर्णन है । इसमें ब्रह्मसृष्टि को मेवा (अंगूर), ईश्वरी सृष्टि को खजूर और जीव सृष्टि को भूसा वाले अन्न के रूप में वर्णित किया गया है । क़ुरआन के तीसरे सिपारे को तिलकर्रसूल सिपारा भी कहते हैं । इसमें केवल कुंन की पैदाइश का वर्णन आयत ४७ में है, किन्तु तफ़्सीर-ए-हुसैनी में इसी सिपारे की व्याख्या में ५ तरह की पैदाइश का वर्णन है ।

तफ़्सीर-ए-हुसैनी भाग १ पृष्ठ ७५ में लिखा है कि जिंदा करने की किस्में हैं जैसे कि खल्क की हस्ती कि कुछ खल्क कुंन से पैदा हुई और बाजों को मखलूकात के सबब से पैदा किया । बाजों को खुदा ने एक हाथ से और बहुतों को पहले ही हस्ती में लाया ।

श्री प्राणनाथ जी की वाणी से इन पाँचों तरह की पैदाइश का बहुत ही सरल शब्दों में स्पष्टीकरण हो जाता है, जो इस प्रकार है-

१. कुंन की पैदाइश (जीव सृष्टि)

२. एक हाथ (रसूल मुहम्मद साहब सल्ल. पर सच्चा ईमान लाने वाले)

३. दो हाथ की (रूह अल्लाह तथा इमाम महदी अर्थात् श्री निजानन्द स्वामी और श्री प्राणनाथ जी की वाणी पर ईमान लाने वाले)

४. मूल इप्तदाए की (ब्रह्म सृष्टि)

५. खिलकत की (ईश्वरी सृष्टि)

(अधिक जानकारी के लिए तीन सृष्टियां देखें)

 

सात दिन की हकीकत

क़ुरआन के पारा ८ आयत ५४, पारा १२ आयत ७, आदि अनेक स्थानों पर ६ दिनों का बयान है । प्रायः मुस्लिम जन इसे मनुष्यों द्वारा बनाये गये सप्ताह के दिनों के समान समझते हैं । यह ६ दिन सप्ताह के दिन नही हैं, अपितु अल्लाह (सच्चिदानन्द परमात्मा) एवं उनकी आत्माओं की लीला के द्योतक हैं । श्री प्राणनाथ जी की वाणी से इसका रहस्य बहुत सरलता से समझा जा सकता है-

१. पहला दिन- क़ुरआन २९/६९/७ में वर्णन है कि हूद नबी के घर सात रात तथा आठ दिन तक भयंकर तूफान चलता रहा । कोहतूर पर्वत के नीचे रूहों की सुरक्षा हुई और सभी काफर डूब मरे ।

यह सच्चिदानन्द परमात्मा (अल्लाह) की ब्रज लीला का ही वर्णन है जब श्री कृष्ण के तन में प्रकट होकर उन्होंने गोवर्धन पर्वत के नीचे सभी गोपियों (रूहों) तथा ब्रजवासियों की रक्षा की ।

२. दूसरा दिन- नूह पैगम्बर के घर तूफान आना । नूह पैगम्बर की किश्ती में चढ़े हुए मोमिनों को उनके बेटे श्याम ने बचा लिया और शेष दुनिया को डुबो दिया । यह प्रसंग क़ुरआन के पारा १९ आयत ११९-१२० और पारा ८ आयत ६४ में वर्णित है ।

यह भी उस घटना का सांकेतिक वर्णन है जब इस सृष्टि का महाप्रलय करके सच्चिदानन्द (अल्लाह) स्वरूप श्री कृष्ण ने योगमाया में सखियों (रूहों) के साथ रास की लीला की ।

३. तीसरा दिन- क़ुरआन २५/४४/५ में वर्णन है कि अरब में मुहम्मद साहब (सल्ल.) क़ुरआन का ज्ञान लाये ।

मुहम्मद साहब के अन्दर भी सच्चिदानन्द के सत् अंग अक्षर ब्रह्म की आत्मा ने ही लीला की तथा परमात्मा (अल्लाह) के आने की भविष्यवाणी की ।

४. चौथा दिन- क़ुरआन २०/२८/८७ में वर्णन है कि ईसा रूह अल्लाह आकर दज्जाल का कत्ल करेंगे ।

यह लीला सच्चिदानन्द के आनन्द अंग श्री श्यामा जी (ईसा रूह अल्लाह) ने श्री देवचन्द्र जी के तन से की । उन्होंने तारतम ज्ञान का प्रकाश करके अज्ञानता रूपी दज्जाल को नष्ट कर दिया ।

५. पाँचवा दिन- क़ुरआन के सूरा २२ आयत १७ और तरजमां इबन माजा शरीफ कामल के पृष्ठ ५२८ पर वर्णन है कि पाँचवे दिन इमाम महदी के रूप में खुद अल्लाह आयेंगे और अपने साथ इल्म-ए-लद्दुन्नी लायेंगे ।

यह वर्णन विजयाभिनन्द बुद्ध श्री प्राणनाथ जी के स्वरूप के लिए है जिन्होंने तारतम वाणी (श्री कुल्जम स्वरूप) का ज्ञान प्रकट करके संसार में अमृत वर्षा की । उन्होंने हरिद्वार के महाकुम्भ में शास्त्रार्थ जीतकर अपने को सिद्ध किया । सभी धर्मग्रन्थों में साक्षात् परमात्मा अल्लाह तआला के प्रकट होने का वर्णन इसी काल के लिए है । एक अनहोनी घटना के रूप में यह शुभ घड़ी आ चुकी है परन्तु मुस्लिम समाज अभी भी इस घड़ी की प्रतीक्षा कर रहा है । इसे ही कतेब परम्परा के अनुसार क़ियामत का आना कहा जाता है ।

६. छठा दिन- मोमिनों को अपने स्वरूप, अल्लाह और अर्श-ए-अज़ीम की पहचान हो जायेगी ।

इस छठे दिन की लीला सुन्दरसाथ में लगभग तीन सौ वर्षों से चल रही है । इन तीन सौ वर्षों में श्री प्राणनाथ जी की बातूनी मेहर से बहुत से परमहंस हो चुके हैं जिन्होंने अन्य ब्रह्मात्माओं को तारतम वाणी के प्रकाश से जाग्रत किया । मुस्लिम समाज इसी दिन के प्रतीक स्वरूप शुक्रवार को छठा दिन मानकर जुम्मे की नमाज पढ़ते हैं । यह उनकी भूल है क्योंकि खुदा के बनाये सभी दिन नेक होते हैं तथा सच्चे मोमिन कभी इबादत के लिए शुक्रवार का इन्तजार नहीं कर सकते ।

७. सातवां दिन- क़ुरआन २२/१७/२३ और तरजमां इबन माजा शरीफ कामल के पृष्ठ ३३७ पर यह वर्णन है कि सातवें दिन अल्लाह इमाम बनकर सबका कज़ा करेंगे और संसार के सभी प्राणियों को उनके कर्मों के अनुसार आठ बहिश्तों में अखण्ड मुक्ति देंगे ।

यह लीला योगमाया के अखण्ड ब्रह्माण्ड में आखिरी इमाम श्री प्राणनाथ जी के द्वारा होगी ।

इस प्रकार श्री प्राणनाथ जी की वाणी श्री कुल्जम स्वरूप में क़ुरआन के ऐसे अनसुलझे रहस्यों को खोला गया है जिसके विषय में कहा जाता है कि उसका अर्थ केवल अल्लाह को ही ज्ञात है । इसी वाणी में हकीकत व मारफत के ज्ञान को भी प्रकट किया गया है जो आज से पहले इस संसार में नहीं था ।

 

प्रस्तुतकर्ता- ज्ञानपीठ छात्र समूह  
   सर्वाधिकार सुरक्षित © श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ सरसावा