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  अध्यात्म  »  परमात्मा एक है

परमात्मा एक है

श्री प्राणनाथ जी का कथन है-                                                

पार ब्रह्म तो पूरन एक हैं , एक थे अनेक परमेश्वर कहावें ।

अनेक पंथ सब जुदे जुदे , और सब कोई सास्त्र बोलावे ।। ( श्री मुख वाणी- कि. ६/७ )

पूर्ण ब्रह्म सच्चिदानन्द तो एक ही हैं , किन्तु इन लोगों ने अलग-अलग अनेक परमात्मा की कल्पना कर ली है । सबके अपने-अपने पंथ और ग्रन्थ हैं तथा सभी अपने ही ग्रन्थ को धर्मशास्त्र मानते हैं ।

वेद में कहा गया है कि एक ही अद्वितीय ब्रह्म को मेधावीजन इन्द्र , मित्र , वरुण , अग्नि , सुपर्ण , गरूत्मान् , दिव्य , यम , मातरिश्वा , आदि अनेक नामों से कहते हैं ( अथर्ववेद ९/१०/२८ ) । उस एक सत्यस्वरूप ब्रह्म के विभिन्न गुणों के आधार पर विभिन्न नाम माने गये हैं । वेद में किसी भी देवी-देवता की स्तुति नहीं है । उस ब्रह्म को अखिल ऐश्वर्ययुक्त होने के कारण इन्द्र , सबके लिए प्रीति का प्रात्र होने के कारण मित्र , सबसे श्रेष्ठ होने से वरुण , ज्ञान स्वरूप होने से अग्नि , उत्तम पालन युक्त गुणों से पूर्ण होने से सुपर��ण , महान स्वरूप वाला होने से गरूत्मान् तथा प्रकाशमय होने से दिव्य कहा जाता है । उस ब्रह्म को ही सबका नियामक होने के कारण यम तथा अनन्त बलयुक्त होने के कारण मातरिश्वा नाम से जाना जाता है ।

शतपथ ब्राह्मण का कथन है कि जो एक परब्रह्म को छोड़कर अन्य की भक्ति करता है , वह विद्वानों में पशु के समान है (श.ब्र. १४/४/२/२२) । वर्तमान हिन्दू मान्यताएँ , जिसमें अनेक देवी-देवताओं की पूजा का विधान है , वैदिक सिद्धान्तों के सर्वथा विपरीत हैं । ग्रन्थों का गलत अर्थ करने से ही इस प्रकार की गलत धारणाओं ने समाज को जकड़ लिया है। ब्रह्म के अतिरिक्त किसी अन्य पंचभौतिक शरीरधारी देवी-देवता की स्तुति मान्य नहीं है । श्रुतियों के द्वारा गान किया गया कि "एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति" अर्थात् परमात्मा तो सर्वकाल में मात्र एक और अद्वितीय है और सर्वत्र उसी को उपास्य माना गया है । सिख गुरु श्री नानक जी ने कहा है- "नानक एको सुमरिए" अर्थात् उस एक परब्रह्म का ध्यान करना चाहिए ।

इसी प्रकार मुस्लिम ग्रन्थों में कहा गया है- "कुलहू अल्ला अहद" अर्थात् खुदा एक है । क़ुरआन में कहा गया है - "वह अल्लाह है जिसके अलावा अन्य कोई भी पूज्य नहीं है । वह पर्दे के पीछे व सामने का ज्ञाता है । वह अत्यन्त कृपाशील (रहमान) और दयावान है । वह अल्लाह है, वह सर्वशासक है, वह अत्यन्त गुणवान, शान्ति स्वरूप, शरण दाता, संरक्षक, प्रभुत्वशाली और अत्यन्त महान है ।" (पारा २८ सूरत ५९ आयत २२,२३,२४) 

बाइबल में कहा गया है - परमात्मा एक ही है, कोई दूसरा नहीं (मार्क १३/३२) । एकमात्र परमात्मा ही हमारा स्वामी है और तुम्हे उससे अपने सम्पूर्ण हृदय, आत्मा, मस्तिष्क और सम्पूर्ण शक्ति से प्रेम करना चाहिए (मार्क १२/२९,३०) ।

 

प्रस्तुतकर्ता- ज्ञानपीठ छात्र समूह  
   सर्वाधिकार सुरक्षित © श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ सरसावा