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  विजयाभिनन्द बुद्ध  »  श्री प्राणनाथ जी की महिमा

श्री प्राणनाथ जी की महिमा

सच्चिदानन्द श्री प्राणनाथ जी की महिमा का शब्दों में वर्णन करना असम्भव कार्य है । जिस हकी सूरत श्री महामति जी के स्वरूप में पाँचों सर्वश्रेष्ठ शक्तियाँ विराजमान हैं, उनके स्वरूप की महिमा का गान करने के लिए यह जिह्वा तथा यह मनुष्य जीवन दोनों ही बहुत छोटे हैं । परम सत्य तो यह है कि श्री प्राणनाथ जी की शोभा, ज्ञान, प्रेम, कृपा व शक्ति अतुलनीय हैं ।

मैं केते नजरों देखे सही , पर गुन मुख से न सके कही ।

ना कछू किनका भोम गिनाए , सागर लेहेरें गिनी न जाएं ।। (श्री मुख वाणी- प्र. हि. ११/८)

श्री महामति जी कहती हैं कि मैंने अपनी नजरों से सच्चिदानन्द श्री प्राणनाथ जी के कई गुण देखे तो हैं, परन्तु वे मुख से कहे नहीं जाते । जिस प्रकार धरती के कण गिने नहीं जा सकते और न ही सागर की लहरें गिनी जा सकती हैं, उसी प्रकार धाम धनी के गुण नहीं गिने जा सकते ।

कोई दम न उठे हु��म बिना , कोई हले न हुकम बिना पात ।

तहां मुतलक हुकम क्यों नहीं , जहां बरनन होत हक जात ।। (श्री मुख वाणी- सि. ३/६२)

परमात्मा स्वरूप श्री प्राणनाथ जी के आदेश के बिना तो कोई प्राणी श्वांस भी नहीं ले सकता और न कोई पत्ता ही हिल सकता है । श्री महामति जी के जिस हृदय से श्री राज श्यामा जी और सुन्दरसाथ के श्रृंगार का वर्णन होता है, वहाँ निश्चित रूप से धनी के आदेश की शक्ति विराजमान है । उनकी आदेश शक्ति से बढ़कर किसी की भी शक्ति नहीं है ।

इन सरूप की इन जुबां , कही न जाए सिफत ।

सब्दातीत के पार की , सो कहनी जुबां हद इत ।। (श्री बीतक साहब ६२/८)

श्री महामति जी के हृदय में विराजमान श्री प्राणनाथ जी के स्वरूप की महिमा इन शब्दों में नहीं कही जा सकती है क्योंकि शब्द तो इस नश्वर संसार के हैं और जिसकी शोभा का वर्णन करना है वे तो शब्दातीत (शब्दों से परे श्री अक्षर ब्रह्म) से भी परे हैं । ऐसे अलौकिक अक्षरातीत स्वरूप इस धरती पर आये हुए हैं ।

सतवादी नाम केते लेऊं , कई हुए तरन तारन ।

सत न छोड़या कई दुख सहे , सो या दिन के कारन ।। (श्री मुख वाणी- कि. ५५/१६)

सत्य के मार्ग पर चलकर वैकुण्ठ-निराकार की प्राप्ति करने वाले तथा दूसरों को भी उस स्तर तक पहुँचाने वाले बहुत से महापुरुष हुए हैं, उनमें से मै कितनों के नाम गिनाऊँ । उन्होंने बहुत कष्ट सहने पर भी सत्य (धर्म) की राह इसलिए नहीं छोड़ी क्योंकि उन्हें पूर्ण विश्वास था कि यह धर्माचरण ही उन्हें एक दिन परमात्मा तक ले जाएगा । अब परमात्मा श्री प्राणनाथ जी के प्रकट होने पर उनका तप फलीभूत हुआ । उन्हीं के जीवों के ऊपर बेहद अथवा परमधाम की आत्माएँ विराजमान हुईं तथा उन्होंने किसी न किसी रूप में श्री जी का साहचर्य प्राप्त किया ।

मूसा इबराहीम इस्माईल , जिकरिया एहिया सलेमान ।

दाऊदें मांग्या मेहेंदी जमाना , उस बखत उठाइयो सुभान ।। (श्री मुख वाणी- सि. १/३६)

हज़रत इब्राहिम, इस्माईल, ज़िकरिया, याहिया, सुलेमान तथा दाऊद मूसा आदि पैगम्बरों ने भी ख़ुदा (परब्रह्म) से प्रार्थना की है कि इमाम मुहम्मद महदी श्री प्राणनाथ जी के समय में उन्हें भी तन मिले, ताकि उनके अलौकिक ज्ञान से वे जागृत हो सकें ।

दुनिया चौदे तबक में , काहू खोली नहीं किताब ।

साहेब जमाने का खोलसी , एही सिर खिताब ।। (श्री मुख वाणी- खि. ११/७३)

चौदह लोकों के इस ब्रह्माण्ड में धर्मग्रन्थों के छिपे हुए रहस्यों को आज तक किसी ने भी नहीं खोला था । तारतम ज्ञान के द्वारा इनके भेदों को खोलने का श्रेय तो मात्र श्री प्राणनाथ जी को ही प्राप्त है, जो इस युग में सर्वेश्वर हैं ।

श्री प्राणनाथ जी ने कुरआन के छिपे हुए सभी रहस्यों को खोलकर यथार्थ सत्य को उजागर किया । उन्होंने कतेब के अतिरिक्त वैदिक परम्परा के सभी धर्मग्रन्थों के रहस्यों को भी स्पष्ट किया । भविष्यवाणियों के अनुसार यही वह समय है, जब सभी धर्मग्रन्थों का वास्तविक अभिप्राय स्पष्ट होना है ।

अब सो साहेब आइया , सब सृष्ट करी निरमल ।

मोह अहंकार उड़ाए के , देसी सुख नेहेचल ।। (श्री मुख वाणी- परि. २/१२)

अब अक्षरातीत इमाम महदी श्री प्राणनाथ जी इस संसार में आए हैं, जिन्होंने इस नश्वर संसार से परे का ब्रह्मज्ञान श्री कुलजम स्वरूप प्रकट किया । इस ब्रह्मज्ञान से सृष्टि के संशय मिट जायेंगे, उनके सांसारिक विकार नष्ट हो जायेंगे तथा सबके हृदय निर्मल हो जायेंगे । अन्ततः अक्षरातीत इमाम महदी अपनी कृपा से सबके मन से मोह व अहंकार का आवरण हटाकर उन्हें योगमाया में अखण्ड मुक्ति प्रदान करेंगे ।

इतहीं सिजदा बंदगी , इतहीं जारत जगात ।

इतहीं जिकर हक दोस्ती , इतहीं रोजा खोलात ।।  (श्री मुख वाणी- सि. २/४६)

अब श्री महामति जी के धाम हृदय में विराजमान परमात्मा अल्लाह स्वरूप श्री प्राणनाथ जी के चरणों में प्रणाम करना है और अनन्य प्रेम लक्षणा भक्ति से इन्हें रिझाना है । इन्हीं के दर्शन करने के लिए तीर्थ यात्रा (जियारत) भी करनी है और इन्हीं पर अपना सर्वस्व समर्पण (जकात) करना है । इन्हीं के चरणों में बैठकर धनी के प्रेम की वार्ता रूपी चर्चा (जिकर) का श्रवण करना है । इन्हीं श्री प्राणनाथ जी के पावन सान्निध्य में श्रृद्धा और सेवा के द्वारा स्वयं को पवित्र करना (रोजे रखना) है ।

तारीफ महंमद मेहेंदी की , ऐसी सुनी न कोई क्यांहे ।

कई हुए कई होएसी , पर किन ब्रह्माण्डों नाहें ।। (श्री मुख वाणी- सनंध ३०/४३)

इमाम मुहम्मद महदी पूर्णब्रह्म श्री प्राणनाथ जी की महिमा के बराबर कहीं भी, कभी भी, किसी की भी महिमा आज तक नहीं सुनी गई । श्री प्राणनाथ जी के अतिरिक्त अन्य किसी को भी साक्षात् परमात्मा अथवा खुदा कहलाने की शोभा नहीं है । आज तक असंख्यों ब्रह्माण्ड हो गये हैं और आगे भी होंगे, परन्तु श्री प्राणनाथ जी के समान महिमा वाला न तो आज तक किसी ब्रह्माण्ड में कोई हुआ है और न ही भविष्य में कभी भी होगा ।

मुक्त दई त्रैगुन फरिस्ते , जगाए नूर अछर ।

रूहें ब्रह्मसृष्ट जागते , सुख पायो सचराचर ।। (श्री मुख वाणी- खु. १३/११२)

परब्रह्म श्री प्राणनाथ जी सभी फरिश्तों, ब्रह्मा, विष्णु, शिव व सम्पूर्ण त्रिगुणात्मक जगत के जीवों को योगमाया के ब्रह्माण्ड में अखण्ड मुक्ति प्रदान करेंगे । वे ही इस नश्वर संसार की लीला को देखने आयी ब्रह्मसृष्टियों (रूहों) व परमधाम की अलौकिक लीला देखने आये श्री अक्षर ब्रह्म (नूरजलाल) को जागृत करके परम आनन्द प्रदान करेंगे ।

खुदा काजी होय के , कजा करसी सबन ।

सो हिसाब जरे जरे को , लियो चौदे भवन ।। (श्री मुख वाणी- कि. ६१/१९)

कुरआन में यह वर्णन है कि स्वयं अल्लाह तआला क़ियामत के समय न्यायाधीश बनकर सबका न्याय करेंगे । इसको सत्य सिद्ध करने के लिए वे श्री प्राणनाथ जी के स्वरूप में चौदे लोकों के प्राणियों का हिसाब लेकर सच्चे न्याय की लीला करने आ गये हैं ।

धंन धंन ब्रह्मांड ए हुआ , धंन धंन भरथखंड ।

धंन धंन जुग सो कलजुग , जहां लीला प्रचंड ।। (श्री मुख वाणी- प्र. हि. ३१/१३३)

जिस लोक में परमात्मा स्वरूप श्री प्राणनाथ जी की अलौकिक लीला हो रही है, वह ब्रह्माण्ड धन्य-धन्य है । भारतवर्ष की भूमि भी धन्य-धन्य है जहाँ उनके चरण पड़े । यह २८वां कलियुग भी धन्य-धन्य हो गया जिसमें कभी न होने वाली ऐसी अद्भुत लीला हो रही है ।

(अधिक जानकारी के लिए श्री प्राणनाथ जी की पहचान व ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित ग्रन्थ प्राणनाथ महिमा पढ़ें)

 

प्रस्तुतकर्ता- ज्ञानपीठ छात्र समूह  
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