Shri Prannath Gyanpeeth-     मासिक पत्रिका आर्थिक सेवा सम्पर्क करें
                                                                 




मुख्य संस्था अध्यात्म निजानन्द दर्शन विजयाभिनन्द बुद्ध ब्रह्मवाणी (तारतम) चितवनि महान व्यक्तित्व साहित्य प्रवचनमाला सुन्दरसाथ
श्री सुन्दरसाथ
     प्रणामी धर्म 
     श्री प्राणनाथ जी की लीला »
          पहला दिन 
          दूसरा दिन 
          तीसरा दिन 
          चौथा दिन 
          पाँचवा दिन 
          छठा दिन 
          सातवाँ दिन 
          सात दिन की लीला का सार 
     श्री प्राणनाथ व श्री कृष्ण 
     Shri Prannath & Shri Krishna 
     श्री प्राणनाथ जी की पहचान 
 
 
 
 
  सुन्दरसाथ  »  श्री प्राणनाथ जी की लीला  »  तीसरा दिन

तीसरा दिन

बसरी स्वरूप की लीला (अरब देश में)

काल- विक्रम सम्वत् ६२७ से ६८९

श्री मुहम्मद मुस्तफा के तन में- पूर्णब्रह्म श्री प्राणनाथ जी (श्री राज जी) का जोश (ज़बराइल), श्री अक्षर ब्रह्म की आत्मा

 

चौपाई-

हुआ मेयराज महंमद पर , तिन में बका सब बात ।

महंमद पोहोंच्या हजूर , तहां देखी हक जात ॥ (श्री मुख वाणी- छो.क. २/३)

फुरमान हकें लिख भेजिया , दिया हाथ रसूल के ।

रूह अल्ला पर भेजिया , किन खबर न पाई ए ॥ (श्री मुख वाणी- छो.क. २/७४)

अल्ला मुहबा मासूक , सो खासी खसम दिल ।

तो नाम धराया रसूलें , आसिक अपना असल ॥ (श्री मुख वाणी- सनंध १/१)

ले फुरमान जो हाथ में , केहेलाया मै रसूल ।

ए देखो अर���ाहें अर्स की , जिन कोई जावें भूल ॥ (श्री मुख वाणी- सनंध १९/९)

बड़ी बड़ाई मोमिनों , जाके बड़े अंकूर ।

तो इन पर रसूल भेजिया , अपना अंगी नूर ॥ (श्री मुख वाणी- सनंध २४/५३)

महंमद आया नूर पार से , याही खेल के मांहें ।

पर इन खेल में का नहीं , सो भी सक राखो नांहें ॥ (श्री मुख वाणी- सनंध २५/१०)

आप रसूल नहीं हद का , इनों अर्सअजीम असल ।

दुनी सुरिया उलंघ न सके , पूरी हद की भी नहीं अकल ॥ (श्री मुख वाणी- सनंध ३०/९)

खेल हुआ हम वास्ते , हम पर हादी ल्याए फुरमान ।

हम वास्ते कुंजी रूहअल्ला , दई इमाम हाथ पेहेचान ॥ (श्री मुख वाणी- सनंध ३९/६३)

 

शोभा- अक्षर ब्रह्म की आत्मा को

सच्चिदानन्द स्वरूप- नहीं ; यह केवल सत् अंग श्री अक्षर ब्रह्म की लीला थी

लीला- ४० वर्ष की आयु में युगल स्वरूप श्री राज श्यामा जी के दर्शन

      तदोपरांत जोश द्वारा विभिन्न स्थानों व समय पर क़ुरआन की आयतों का अवतरण 

      मूर्ति व अनेक ईश्वर की पूजा का खण्डन करके एक अल्लाह (श्री प्राणनाथ जी) की बन्दगी का प्रचार

      अल्लाह के इमाम महदी साहिबुज़्जमां (श्री प्राणनाथ जी) के रूप में आने की भविष्यवाणी प्रकट की

      अरब के बादशाह अबु ज़हल से कठोर संघर्ष व विजय 

      दूज के चन्द्र के समान शोभा

लीला के पश्चात् परिणाम-

श्री प्राणनाथ जी की जोश शक्ति व अक्षर ब्रह्म की आत्मा का गमन

श्री मुहम्मद मुस्तफा के जीव को भेंटस्वरूप अखण्ड योगमाया के सबलिक ब्रह्म (तीसरी बहिश्त) में मुक्ति

श्री मुहम्मद मुस्तफा नामक तन की मदीना में मृत्यु

 

प्रस्तुतकर्ता- ज्ञानपीठ छात्र समूह  
   सर्वाधिकार सुरक्षित © श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ सरसावा