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सातवां दिन

न्याय की लीला (योगमाया में)

काल- अभी प्रारम्भ नहीं हुई

चौपाई-

मैं आया हों अव्वल , आखिर आवेगा खुदाए ।

काजी होए के बैठसी , करसी सबों कजाए ॥ (श्री मुख वाणी- कि. १०८/८)

विजिया अभिनंद बुधजी , और नेहेकलंक अवतार ।

कायम करसी सब दुनियां , त्रिगुन को पेहेंचावें पार ॥ (श्री मुख वाणी- खु. १३/५९)

लीला- इस ब्रह्माण्ड का महाप्रलय करके योगमाया के ब्रह्माण्ड में श्री महामति जी द्वारा सभी जीवों का न्याय (कज़ा) होगा । सबको तारतम ज्ञान का प्रकाश मिलेगा । जिन जीवों ने पाँचवें तथा छठे दिन की लीला में श्री प्राणनाथ जी पर पूर्ण समर्पण किया, उन्हे श्रेष्ठतम बहिश्त में अखण्ड मुक्ति मिलेगी तथा वे परम आनन्द को प्राप्त करेंगे । जिन जीवों ने उन पर विश्वास नहीं किया, उन्ह���ं दोजख में जलाकर निम्नतम बहिश्त में मुक्ति दी जाएगी । श्री प्राणनाथ जी के आगमन व कृपादृष्टि से सभी जीवों का उद्धार हो जाएगा ।

 

प्रस्तुतकर्ता- ज्ञानपीठ छात्र समूह  
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