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श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ (सरसावा) में निर्मित भवन

श्री रतन ध्यानागार (ध्यान कक्ष)

ध्यान कक्षश्री रतन ध्यानागार में २४ भूमिगत छोटे कमरों का निर्माण किया गया है । इन कक्षों का निर्माण चितवनि (ध्यान) को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया है । जमीन के नीचे होने के कारण यह कमरे बाहरी शोर से बचे रहते हैं तथा साथ ही उनमें सुगम वायु संचार का भी ध्यान रखा गया है । एक कमरे में एक ही व्यक्ति ध्यान कर सकता है । कुछ कमरे ज्ञानपीठ के छात्रों व आचार्यों के लिए आरक्षित किये गये हैं, परन्तु अधिकांश कमरे सुन्दरसाथ के लिए उपलब्ध हैं । हर सुन्दरसाथ के लिए यह अवसर है कि वह अपनी सुविधानुसार पूर्व निर्धारित तिथियों (लगभग एक सप्ताह) के लिए एक कमरा अपने नाम सुरक्षित करवा ले । फिर वह उतने दिन उस कक्ष में चितवनि का लाभ ले सकता है । अलग-अलग प्रान्तों से पधारे सुन्दरसाथ साल भर इस चितवनि के कार्यक्रम में सम्मिलित रहते हैं । इस प्रकार सुन्दरसाथ को दीर्घ अवधि के ध्यान का अभ्यास होता है, जो समाधि (साक्षात्कार) के रूप में फलीभूत हो सकता है । इन कक्षों का उद्घाटन २५ मार्च २०१३ को होली महोत्सव के दौरान किया गया ।

श्री प्राणनाथ पुस्तकालय (ज्ञान मंदिर)

एक विशाल पुस्तकालय का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है । ज्ञानपीठ के चतुर्थ वार्षिकोत्सव २०१० में इसका शुभारम्भ भी किया गया । इसमें प्रायः सभी धर्मग्रन्थों (वेद व कतेब), दुर्लभ पाण्डुलिपियों , शोध पुस्तकों , प्राचीन साहित्य , समसामयिक पत्र व पत्रिकाओं की लिखित एवं प्रकाशित प्रतियों का संग्रह किया जाएगा । इसमें लगभग दो लाख पुस्तकों को संग्रहित करने की क्षमता है । यह पुस्तकालय आध्यात्मिक जगत की गहन समीक्षात्मक शिक्षा एवं शोध कार्यों में अति उपयोगी होगा ।

प्रवचन भवन

आध्यात्मिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए एक थम्भाधारित खुले प्रवचन भवन का निर्माण हो चुका है । इसकी वर्तमान क्षमता २००० लोगों की है, जिसे आवश्यकतानुसार भविष्य में १०००० तक बढ़ाया जा सकता है । ज्ञानपीठ के चतुर्थ वार्षिकोत्सव २०१० में इसका प्रयोग किया गया तथा सुन्दरसाथ को इससे भरपूर लाभ मिला ।

श्री प्राणनाथ मंदिर

एक सुन्दर मंदिर का निर्माण किया गया है , जहाँ सिंहासन पर अक्षरातीत परमात्मा के वाङमय क्लेवर के रूप में श्री मुखवाणी की पधरावनी की गई है �� इस मंदिर का निर्माण व पधरावनी कार्यक्रम वर्ष २००९ में बहुत धूमधाम से मनाया गया ।

 

शिक्षार्थी निवास

इसके अन्तर्गत २० कमरे निवास हेतु तथा २० शौचालय एवं स्नान-घर बन चुके हैं। इस दोमंजिला भवन के विशाल कमरों में बड़ी सरलता से २०० छात्रों की व्यवस्था की जा सकती है । शिक्षार्थियों की संख्या बढ़ने पर इन कमरों  की संख्या में आवश्यकतानुसार वृद्धि की जाएगी ।

 

भोजनालय

एक भोजनालय तैयार किया गया है , जिसमें भोजन बनाने व परोसने की पूरी व्यवस्था है । आवश्यकता पड़ने पर तथा उचित समय आने पर इसको वृहद आकार देने की योजना है , जिससे न केवल शिक्षार्थी अपितु किसी कार्यक्रम अथवा शिविर में भाग लेने वाले समस्त सुन्दरसाथ भी इसमें भोजन पा सकें ।

 

गौशाला

ज्ञानपीठ में निवास करने वाले सभी विद्यार्थियों व सुन्दरसाथ के सेवन हेतु दूध अर्जित करने के लिए एक गौशाला का निर्माण किया गया है । वर्तमान काल में इसमें १० गायें हैं तथा उनके निवास , सुविधा , चारादि की उचित व्यवस्था की गई है । भविष्य में इनकी संख्या में वृद्धि प्रस्तावित है । इसके निकट ही एक गोबर-गैस प्लांट बनाया गया है, जहाँ से गैस की आपूर्ति सीधे भोजनालय में की जाती है ।

 

प्रस्तुतकर्ता- ज्ञानपीठ छात्र समूह  
   सर्वाधिकार सुरक्षित © श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ सरसावा