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श्री प्राणनाथ जी का प्रकटन समय

हिन्दू धर्मग्रन्थों में विक्रम सम्वत् १७३८ या शक सम्वत् १६०० होने पर अक्षरातीत परब्रह्म विजयाभिनन्द निष्कलंक बुद्ध के प्रकट होने का वर्णन है । कतेब परम्परा में हिजरी सन् १०९० में आख़रूल इमाम महंमद महदी साहिब़ुज्ज़मां के प्रकट होने की बात कही गयी है । विक्रम सम्वत् १७३८ या शाका सालिवाहन (शक सम्वत्) १६०० वर्ष या हिजरी सन् १०९० या ईस्वी सन् १६९१ सभी एक ही समय के अलग-अलग नाम हैं ।

उपरोक्त समय भारत में श्री मिहिरराज (आत्मा श्री इन्द्रावती जी) के तन से अक्षरातीत परब्रह्म अल्लाह तआला श्री प्राणनाथ जी पूर्ण रूप से प्रकट हुए ।

 

प्रस्तुतकर्ता- ज्ञानपीठ छात्र समूह  
   सर्वाधिकार सुरक्षित © श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ सरसावा